मेरे साँसों की आवाज़..

तुझ संग  बिताये पल जैसे एक ख्वाब -
तुझ से थी रौशनी -
और तुझ से ही ज़िन्दगी हसीन.
तेरी मीठी आवाज़ से होता सवेरा -
ढलती तेरी आँखों में शाम.

तेरे जाने से जो
हुआ ज़िन्दगी में अँधेरा,
सोचता हूँ
कब आएगा अब सवेरा.

तुझ सी ना कोई कभी 
न थी, न होगी मेरे लिए.
इस कलम से जलाता हूँ 
अपनी गुजरी ज़िन्दगी के दिए 

खो गया हूँ जालिम दुनिया के सागर में
न कोई कश्ती 
और न कोई किनारा 
ढूँढ रहा मैं 
कोई सहारा.